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धरती का शृंगार करें

हरित चुनर ओढ़े वसुधा, अनुपम रूप निखार रही,
मंद समीर संग प्रकृति अपनी छवि मनोहर सँवार रही।
तरु-पल्लव जीवन के प्रहरी, सुख-शीतल वरदान हैं,
स्वच्छ वायु, फल-फूल देकर करते जग का कल्याण हैं।।

विकास की आड़ में पेड़ों की हुई तबाही,
भावुक कवि को झकझोर गई पेड़ों की करुण पुकारे,
आओ हम सब मिलकर, धरती का शृंगार करें।।
वृक्ष लगाएँ, पर्यावरण प्रदूषण का उपचार करें॥

हरी-भरी अपनी वसुंधरा, वन-उपवन आच्छादित हों,
शहर-गाँव स्वच्छ निर्मल हों, सबके मन आल्हादित हों।।

जन्मदिवस अरु ब्याह दिवस पर, पौधा एक लगाएँ,
हर आँगन में तुलसी का पौधा, सुंदर सुखद सजाएँ।
बरगद, पीपल, नीम, आम के सुंदर तरु तैयार करें,
गुणकारी वृक्षों से हम मिलकर, धरती का शृंगार करें॥

सुखद उपवन और वाटिका का पुष्पों से शृंगार करें,
देख-भाल पुत्रवत जैसे, हम तरुओं से प्यार करें।
वृक्ष-गंगा अभियान चलाकर, स्वप्न सभी साकार करें,
सृजन-शक्ति संयुक्त लगाकर, धरती का शृंगार करें॥

डाॅ. सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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