
मत पालो ऐसा भ्रम
समय पर समय कोई क्यूं कर देगा मुझको
सब ढकोसला है मत आग में झोंको खुदको
अपने तभी अपने हैं जब तक खुश रखो उनको
अच्छा लगता है कहना सुनना पढना
विपदा पर मित्र ही साथ खडे नजर आते हैं
इसे मान हमने लुके छिपे भी मदद दी जिनको
जब भाग्य कुपित हुआ सांत्वना तक न मिली
कैसे कहें कि समय पर कोई समय देगा हमको।
-गोवर्धन थपलियाल












