
भाव भक्ति के संग में, करें ईष्ट का ध्यान।
पावन प्यारी छवि लगे, सहज विष्णु भगवान मिलती अतिशय शांति है मन करता विश्राम ,
भजन करें हरि नाम का, त्याग सकल अभिमान।।
बड़ी सुहानी ऋतु लगे, करे तपन को दूर।
धरती भी मुस्का रही, हरियाली भरपूर।
वरुण देवता की कृपा, रिमझिम गिरती बूँद, शीतल बहे बयार है ,प्रकृति लगे ज्यों हूर।।
सारहीन मत बात कर, नहीं सुखद परिणाम।
करो नहीं मनभेद है, जपो ईश का नाम।
चरण-शरण गुरु के चलो, खुले प्रगति के द्वार,
ज्ञान यज्ञ की ज्वाल से,सदा सुवासित धाम।।
मूल्यवान होता समय, करो नहीं बर्बाद।
मिले आत्मसम्मान है, जब हो शुभ संवाद।
शुभ कर्मों से व्यक्ति हो, जगती में विख्यात,
बीता वक्त न लौटता, बात रखो यह याद।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश












