
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी
रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
।।आरती मातृशक्ति ब्रह्मचारिणी की।।
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आरती करें शांति रूपा मां ब्रह्मचारिणी जी की ।
दिव्य रूपा परम तपस्विनी जी की ।।
मनोवांछित फल पूर्णा सिद्धा आचारिणी जी की।
आरती करें—–
दिव्यशक्ति रूपा तपस्विनी जी की ।
वाम हस्त में कमण्डल, दूजे में चन्दन माल विराजे।।
मन का ध्यान अटल है , जो मस्तक पर साजे।
आरती करें——-
तपस्विनी बन सहस्राब्द शिव में ध्यान रमाया ।
कंद-मूल तरुपत्र सहारे तपस्या में ध्यान लगाया।
आरती करें – – – – –
प्रकृति मे रम कर तूंने लक्ष्य-भेद का बोध कराया ।
जिस सत्ता काआदि है न अन्त का बोध कराया।
आरती करें——
शिव की तोड़ी तंद्रा,तब तूंने महादेव को हर्षाया।
पति रूप में वरण किया,परम सौभाग्य को पाया।
आरती करें——-
इस जग को अटूट लग्न का अर्थ समझ मेंआया ।
जो नर करे ध्यान,कभी न जी उस का भरमाया ।
मां का मिला ध्यान ‘महेश’ ने हर जन्म जो पाया।
आरती करें शांति स्वरूपा मां ब्रह्मचारिणी जी की
दिव्य रुपा परम तपस्विनी जी की ।।












