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कृपा करो माता रानीमाँ ब्रह्मचारिणी

 दर्शन को माँ तेरे द्वार  पर आई ,
 कृपा करो माँ जगदम्बे भवानी।
 द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी माँ,
 कठिन  तप से  तपश्चारिणी  माँ।

विश्वरचयिता,धर्मचारिणी अंबे,सारी विद्याओं की ज्ञाता।
सफल करो जीवन हेअंबे,कृपा करो याचक हूं माता।

  दो भुजा  वाली  मेरी  मैया,
  श्वेतवस्त्रधारिणी,ज्योतिर्मयि।
  दायें कर में अक्षय माला  है, 
  बायें  कर   में   कमंडल  है।

महादेवि हे जगजननी माँ,सधे भक्ति वह युक्ति दो।
ब्रह्मचारिणीहे माँ दुर्गे, तप करने की शक्ति दो।

  संयम, सेवा  सदाचार  को ,
 जीवन का आधार  बना दो।
 दीनन के दुःख  हरने वाली,
 शांतिमय  संसार  बसा  दो।

त्रिभुवन सुंदरी हे माँ अंबे,भव बंधन से मुक्ति दो।
जो जन प्राणी ध्यान धरे,उसका मनोरथ सिद्ध कर दो।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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