
विषय: नवरात्रि में गरबा की रंगीन छटा
नौ रातों का पावन पर्व, खुशियों की सौगात,
माँ दुर्गा की भक्ति में, जगमग करती रात।
रंग-बिरंगे कपड़े पहने, सजे हुए हर द्वार,
गरबा की मधुर धुनों से, गूँजे सारा संसार।
घूमे चुनरी लाल-पीली, खनके चूड़ियाँ प्यारी,
पायल की झंकार सुनो, लगती रात निराली।
हाथों में डांडिया लेकर, जब कदम बढ़ाते हैं,
माँ अम्बे के जयकारों से, सब झूमते-गाते हैं।
गुजरात की धरती पर, गरबा रंग जमाता है,
भक्ति और उल्लास का सागर, मन में लहराता है।
गोल-गोल घूमते कदम, जैसे चाँद-सितारे,
दीपों की उजली लौ में, लगते सपने प्यारे।
माथे पर बिंदिया चमके, आँखों में विश्वास,
माँ के चरणों में अर्पित हो, हर धड़कन हर साँस।
न कोई छोटा, न कोई बड़ा, सबका एक सम्मान,
गरबा जोड़ता दिलों को, प्रेम बने पहचान।
ढोल की थाप पर थिरके तन, मन में भक्ति अपार,
माँ के दरबार में मिलता, खुशियों का उपहार।
घूमे धरती, झूमे अंबर, गूँजे माँ का नाम,
हर दिल में श्रद्धा जागे, हर होंठों पर प्रणाम।
नौ रातें केवल नृत्य नहीं, संस्कृति का अभिमान,
नारी शक्ति, प्रेम और एकता का सुंदर गुणगान।
दीप जले और दुख मिट जाएँ, खुशियों की बरसात,
माँ अम्बे की कृपा से महके, जीवन की हर रात।
हे जगदंबे! इतनी कृपा, हर घर सुख से भर जाए,
हर बेटी निर्भय होकर, अपने सपने सजाए।
गरबा की हर थाप कहे, प्रेम का दीप जलाओ,
भक्ति, शक्ति और मानवता से, सुंदर जग बनाओ।
जय अम्बे गौरी, जय माँ भवानी,
तेरी महिमा सबसे निराली!
नौ रातों तक गूँजे जयकारा,
माँ के चरणों में जग सारा!
जय माता दी! शुभ नवरात्रि!
रचनाकार: राजनीता प्रसाद
पता – शकूरपुर, आनंदवास, नई दिल्ली 110034












