
कक्षा केवल चार दीवारों का नाम नहीं होती,
यह सपनों की पहली उड़ान का आसमान होती।
यहीं अक्षरों से परिचय और ज्ञान मिलता है,
यहीं जीवन को नई दिशा और पहचान मिलती।
ब्लैकबोर्ड के शब्द भले समय संग मिट जाते,
पर उनसे मिले संस्कार सदा अमर रह जाते।
घंटी की ध्वनि हर दिन नया संदेश सुनाती,
हर पाठ जीवन का सुंदर अध्याय बन जाती।
कभी प्रश्नों में उलझे चेहरे, कभी मुस्कानें खिलतीं,
मित्रता की मधुर सरगम संग आशाएँ भी मिलतीं।
शिक्षक का स्नेहिल मार्गदर्शन दीपक बन जाता,
अज्ञान का तम हरकर ज्ञान-सूर्य उगाता।
कक्षा के वे छोटे क्षण स्मृतियों में बस जाते,
हँसी, सीख और संघर्ष जीवन को सजाते।
ये पन्ने अनुभव, प्रेम और संस्कारों की थाती,
जीवन भर प्रेरणा देकर राह नई दिखलाती।
डॉ. बीएल सैनी
प्राचार्य
श्री आदर्श महिला बीएड कॉलेज
श्रीमाधोपुर सीकर राजस्थान













