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ममता मर्यादा और मधुरता

देखो सावन नदियों से मिल,
बिना रुके अविरल बहता है।
सावन की उन बूँदों के लिए,
कभी सावन भी तरसता है।
सावन जब नदियों से मिलता
तब धरती हरसाती है।
सच्चा प्रेम हृदय को मिलते ही,
पत्थर में धड़कन आ जाती है।
इर्ष्या है काँटों भरी क्यारी,
वह हमको चुभती है।
प्रेम का दीप जला हृदय में,
धड़कन राहों को रोशन करती हैं।
पलकें जब उसकी झपकें तो,
लगे सावन बरसता है।
करुणा का भाव लिए आँखों में,
चेहरे पर सूरज खिलता है।
उन पलकों के झपकने से
जैसे मन में अंधियारा होता है।
अधरों पर अनुराग लिए जब,
बोले तो कलियाँ खिलती हैं।
जब करुणा की कलियाँ खिलती हैं,
प्रेम की बारिश होती है।
ममता मर्यादा मधुरता,
मन के सच्चे गहने हैं।
इन गहनों से श्रंगारित जो है,
वे सारे ही तो अपने हैं।
सोने चांदी से भी महँगी,
इस श्रृंगार की कीमत है।

सुनीता बोपचे सिवनी (म प्र)

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