Uncategorized
Trending

शब्दों के संगम, भावों के दीप

शब्दों के संगम, भावों के दीप,
ज्ञान की गंगा, मन के मीत।
जबलपुर की माटी से निकले,
कविता के सागर, सच्चे पुनीत।।

नौकरी छोड़ी, मोह को त्यागा,
हिंदी की खातिर सब कुछ वार दिया।
राष्ट्रभाषा का सपना लेकर,
जीवन अपना न्यौछावर कर दिया।।

कलम आपकी बोले मीठी बानी,
हर अक्षर में जीवन की कहानी।
गुरुवर आपसे पाया प्रकाश,
साहित्य का सूरज, मन का आकाश।।

आज जन्मदिन पर ये अरदास,
सदा रहे खुशियों का आवास।
स्वस्थ रहें, मस्त रहें, यश पाएँ,
शब्दों से जग को महकाते जाएँ।।

कवि गोपाल जाटव ‘विद्रोही’
खड़ावदा, तह. गरोठ, जिला मन्दसौर (म.प्र.)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *