
कुछ नशा मातृभूमि की शान का है,
कुछ नशा तिरंगे की आन का है।
80 वें स्वतंत्रता दिवस पर लहराएँगे
तिरंगा, नशा भारत के सम्मान का है।
अमृत महोत्सव देश की आज़ादी का,
हर अट्टालिका पर और हर गुम्बज पर
राष्ट्र गान हम गाएँगे, तिरंगा फहरायेंगे
वंदेमातरम्, वंदेमातरम्, वंदे मातरम् गाएँगे।
याद आ रहे हैं लाल, बाल व पाल हमें
गांधी, सुभाष और जवाहर लाल हमें,
शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु,
हँसते हँसते फाँसी चढ़े थे क़ुर्बानी में।
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिलमें है,
मेरा रंग दे वसंती चोला वै रंग दे वसंती चोला,
गाते गाते हर गलियों में हर टोले में,
आज़ाद लड़े थे इस जंगे आज़ादी में।
संकल्प हमारा है देश के लिये मर-
मिटने का, जब भी अवसर आएगा,
ख़ुशी ख़ुशी सूली पर चढ़कर एकबार
फिर भारत दिखलाएगा, मिट जाएगा।
जय जय जवान, जय हो किसान,
जय विज्ञान और जय हिंद का नारा,
एक बार ज़ोरों से होगा फिर बुलंद,
जीतेंगे सारी कायनात व हर एक जंग।
सत्य-अहिंसा और धर्म का प्यारा नारा,
गागाकर झंडा ऊँचे से ऊँचा फहराएँगे,
क्योंकि कुछ नशा मातृभूमि की शान का है।
और कुछ नशा तिरंगे की आन का है॥
80 वें स्वाधीनता दिवस एवं भारत की
आज़ादी के अमृत महोत्सव पर सभी
सम्मानित देशवासियों, महिलाओं व
होनहार सभी बच्चों को सपरिवार
हार्दिक बधाई व अनंत शुभ कामनायें
व सादर नमस्कार।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्या वाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ












