
मोहे तीन रंग
सुहाणां लागे रे,
तिरंगा घणां ही प्यारा लागे,
सीदे सीदे रे भाई तिरंगा ने,
और डोर लम्बी लगादे रे ,
लहराएं तिरंगा मारो ऊपर खुलें आसमान में ,
लहरातो दिखे
सुहाणों लागे रे,
इण तिरंगा का तीन रंग,
केसरिया, सफेद और हरा रंग, मतवाला रे,
बीच में चक्र की कलियां , इनको निलो रंग मतवालों लागे रे
आन बान शान से लहराया , आसमां में,
म्हाने यो परचम तिरंगा प्यारा लागे रे,
झंडा ऊंचों,
आसमां में ,
लहराता हुआ सुहाणों लागे।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)












