
नवदुर्गा की तीसरी शक्ति माता
चंद्रघंटा की नवरात्रि उपासना में
तीसरे दिन की पूजा की जाती है,
जिनकी सवारी भी सिंह होती है।
माँ चन्द्रघंटा का यह स्वरूप परम
शांतिदायक व कल्याणकारी है,
मस्तक पर घंटे सा अर्ध चन्द्र है,
इसीलिये इनका नाम चंद्रघंटा है।
इनका रंग स्वर्ण सा चमकता है,
माँ दस भुजा अस्त्र-शस्त्र धारी हैं,
युद्ध की तैयारी सी इनकी मुद्रा है,
फिर भी सिंहासना सौम्य शांत हैं।
इनकी साधना वीरता, निर्भीकता,
विवेक, विनम्रता का भाव देती है,
आदित्य माँ की भक्ति साधक को,
कष्टों से मुक्त कर सर्व सुख देती है।
डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ













