Uncategorized
Trending

ख़फ़ा रहता हूँ,


आजकल मैं खुद से ही ख़फ़ा रहता हूँ,
न जाने क्यों खुद पर ही उखड़ा रहता हूँ।

बहुत मशहूर कर दिया है मुझे मेरी आदत ने,
आजकल आँगन में बैठ के कबूतर उड़ाता हूँ।

कल देखा था उसने मुझे चिड़ियाँ चराते,
हँसकर बोली — “तुम तो अब बच्चे बन जाते!”

मैं मुस्कुराया, मगर दिल कहीं और था,
वो बचपन ढूँढ रहा था जो अब खो गया था।

मुद्दतें गुज़र गईं — खुलकर हँसा नहीं हूँ,
अब तो जगह-जगह हँसी ढूँढता फिरता हूँ।

मेरे गाँव से जो दरिया बहता है, मशहूर हो गया है —
सुना है, वो जादू जानता है… लोगों को गायब करता है।

हमारे पंचायत के मुखिया जी अब नेता बन गए हैं,
सुना है, आजकल राह में कटे बिछाते फिरते हैं।

मैं बहुत ख़फ़ा हूँ —
खुद से, और अपने ही साये से,
क्योंकि अब गाँव में भी दिनदहाड़े
अरमानों का लुटेरा घूमता है।
आर एस लॉस्टम

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *