
विधा: मुक्त छंद कविता
कविता:
हरी-भरी लताएँ, मनी प्लांट की बात,
घर के कोने में, बिखेरती हरियाली की रात।
पत्तियाँ चमकतीं, जैसे सितारों का मेल,
खामोशी में गाती, प्रकृति का अनमोल खेल।
दीवारों पर चढ़ती, नाजुक सी लहर,
सपनों को सहलाती, लाती जीवन में पहर।
नन्हा सा पौधा, पर इरादा है बड़ा,
खुशहाली का वादा, हर पत्ती में सदा।
धूप की किरणों से, करती है दोस्ती,
छाया में भी खिलती, उसकी अपनी मस्ती।
मनी प्लांट मेरी, घर का सच्चा साथी,
हर मुश्किल में देती, आशा की नई गाथी।
जड़ें उसकी गहरी, मिट्टी से जुड़ाव,
हर डाल पर झलकता, जीवन का विश्वास।
नन्हे गमले में, बस्ता है एक जहान,
हर पत्ता बतलाता, प्रकृति का सम्मान।
हवा के झोंकों संग, नाचती है चंचल,
खिड़की के पास बैठ, सुनाती गीत सजल।
उसकी हर लहर में, बस्ता है एक राज,
खामोश सिखलाती, जीने का अंदाज।
कभी टेढ़ी-मेढ़ी, कभी सीधी राह,
हर मोड़ पर खिलती, नहीं डरती कभी आह।
मनी प्लांट सिखाती, जीने की एक कला,
संघर्ष में भी रखना, मन का उजला जला।
बरसात की बूंदों से, उसका नाता पुराना,
हर बूंद में बसता, उसका सपना सुहाना।
घर की शोभा बढ़ाए, लाए सुख की छाँव,
मनी प्लांट मेरी, है जीवन का गौरव। ।
रचनाकार: कौशल













