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गुरु नानक देव

झूमे धरती, झूमे अंबर,जब गुरु का नाम पुकारा,
करतारपुर के वासी,गुरु नानक,तूने जग को तारा।

एक ही नूर से सब जग उपजा,यह संदेश सुनाया,
जात-पात के बंधन तोड़े,प्रेम का दीप जलाया।

तलवंडी में जन्म लिया,पर दिल में था संसार,
भाई मरदाना साथ में तेरे,गूंजे रबाब की तार।

गई उदासियाँ दूर-दूर तक,सत्य का मार्ग दिखाया,
मक्का,मदीना,बगदाद गए,वहाँ भी ज्ञान सुनाया।

सच्चा सौदा किया जगत में,भूखों को भोजन कराया।
​पाखंड और आडंबर को तूने,पल में दूर भगाया।

लंगर में सब एक बराबर,कोई नहीं ऊँच-नीच,
मानवता की सेवा ही है,जीवन की सच्ची सीख।

‘एक ओंकार’ की महिमा गाई, ईश्वर केवल एक है,
जपुजी साहिब की बाणी में,जीवन का हर लेख है।

अंधेरे में थे लोग भटकते,तूने राह दिखाई,
तेरी किरपा ने ही गुरुवर,सबकी किस्मत चमकाई।

          
  रीना पटले (शिक्षिका)
  सिवनी (मध्य प्रदेश)

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