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ग़ज़ल-


हमारी शान है उतनी हमारे आशियानों में।
वतन का नाम है जितना जहाँ के आसमानों में।

लगा दें जान की बाज़ी हम अपनी शान की ख़ातिर,
यहाँ है देश भक्ति की रिवायत घर-घरानों में।

यहाँ नदियों की कलकल और हवाओं में तरन्नुम है,
प्रकृति की सदाओं का असर है हर तरानों में।

यहाँ हिंदी की संगत में मचलती बोलियाँ कितनी,
लगे मिश्री सा मीठा-पन हमारी हर ज़बानों में।

भरोसा आज हमकों सब हमारे हौसलों का है,
कि जितना पंछियों को है सभी अपनी उड़ानों में।

शहादत से जुड़े किस्से हमारे साथ जितने हैं,
बसा रक्खे हैं वो हमनें दिलों के हर ठिकानों में।

हमारे दुश्मनों ने ख़ूब अपने मुँह की खाई है,
रखी है देश ने अपनी अना अपनें जवानों में।

-–नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार( मप्र )

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