
महर्षि दयानंद, आर्य समाज के संस्थापक, वेदों के ज्ञाता थे
उनका जन्म 12 फरवरी 1824 को
गुजरात में हुआ था
उनका मूल नाम मूल शंकर से सुशोभित थे
आर्य समाज की स्थापना कर
समाज को जागृत किया, ज्ञान की ज्योति दिया
वेदों का अध्ययन किया, वेदों की ओर लौटने का आह्वान किया
अज्ञानता को दूर किया, ज्ञान का प्रकाश फैलाया
महर्षि दयानंद समाज के सुधारक,
सत्य के पुजारी, वेदों के ज्ञानी
समाज को सत्य का मार्ग दिखाया
उन्होंने कहा, “वेदों की ओर लौटो”
सत्य का मार्ग है सबसे उत्तम
महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की
जिन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त अंधविश्वासों, कुरीतियों के खिलाफ
एक आंदोलन चलाया
उन्होंने सामाजिक सुधार, शिक्षा और राष्ट्रीय जागरण के महत्त्व पर प्रकाश डाला
हमें उनके पदचिन्हों पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं
महर्षि दयानंद, आपको नमन है
आपके चरणों में मेरा वंदन है
डॉ मीना कुमारी परिहार












