
आ गले लग जाओ तुम
कि याद बहुत आती हो तुम
हमदोनों ही एक ही है
तो फिर दूर क्यों खड़ी हो तुम?
तुम्हारे बगैर अब कोन है यहाँ, मेरा
एक तुम ही हो और तु ही सहारा
इस तरह अजनबी जैसी ना बनो तुम
अपने हो तु और दूजा ना हो तुम
खामोशी को तोडो अब तुम
दूर कर दो मन से शिकवे तुम
कह दो दिल की बाते अब,तुम
शांत रहकर मत तडपाओ मुझे तुम
एक भय सा जगा रखती हो मुझे तुम
खोने का डर जगाती हो मुझे, तुम
वक्त भी अच्छा है ये तो समझती हो तुम
आ गले लग आओ अब,तुम
कसम से,मेरे वादे को यकीन करो तुम
दूर ना जाऊंगा ,मानो मेरी बात तुम
गलती होती है सबो से, ये जानती हो तुम
लेकिन माफी भी तो होता है, ये मानती हो तुम
अब इतनी मुझे मत बैचेनी करो तुम
आ गले लग जाओ तुम
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड












