
क्या लिखूं मैं प्रभु भजन संध्या कीर्तन
या लिखूं मां बाप के चरणों का वंदन
क्या लिखूं मैं सनम की आंखों पर कविता कोई
या लिखूं तरसती मां की आंखों की नमी
क्या लिखूं बचपन की अल्हड़ मस्त जवानी
या लिखूं नन्हे हाथों में किताबों की जगह घर की जिम्मेदारी
क्या लिखूं ऊंचे महल चौबारे हसीन मंजर
या लिखूं सड़क किनारे बरसात मे
छतरी में सिकुड़ती बूढी अम्मा
क्या लिखूं आज के फैशन में वो फटी जींस
या लिखूं सड़क किनारे सिसकती अर्धनग्न अचेत लड़की
क्या लिखूं धरती से चांद का सफर
या लिखूं आज भी समाज की औरतों प्रति खोखली मानसिकता
क्या लिखूं धरती मां के वीरों की गाथा
या लिखूं द्रोपदी का चीरहरण करने वाला दुशासन
क्या लिखूं मां बाप बच्चों के लिए समर्पण
या लिखूं बूढ़ी आंखों में बच्चों को देखने की तड़पन
क्या लिखू समझ नहीं आता मुझे
कलम भी सोच में पड़ जाती है
क्या लिखूं कलम भी खामोश हो बैठ पूछ रही है
क्या लिखूं क्या लिखूं
प्रिया काम्बोज प्रिया
सहारनपुर उत्तर प्रदेश












