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इजहार


इजहार करना,सबसे कठिन रहा मेरा
वर्षो तक प्रयासरत रहा,मन मेरा
मालूम था सारी बाते,मुझे उनकी
फिर भी मन,खामोशी मे रहा मेरा ।

भय मन मे ,एक रहा सदैव बना
शायद वो ,कहीं ना कर दे मना
साथ रहे वो,सदा मेरे
अतः #इजहार से खुद को पड़ा रूकना ।

ख्याल वो मेरा,ऐसे थी रखती,
जैसे,मेरी माँ मुझे थी रखती
क्या खाये,क्या पहनें कहाँ हो?
पल पल की वो,खबर थी रखती ।

शायद इसे ही ,समझा प्रेम मैने
और उसकी हर बात,लगा मानने,
जो भी लगे,उसे अच्छा
वही काम लगा ,मै करने ।

लेकिन ऐसा कितने दिनों तक चलेगा?
यही ख्याल मेरे मन को,खाने लगा
प्रेम का बीज तो,बो ही दिया था
शायद उसके भी मन मे,प्रेम होगा??

और एक दिन,चुन्नू कवि ने,
साहस कर मन को,चला कहने
कि,आज उससे कह ही दूंगा
जिंदगी तुझसे ही अब,मुझे बिताने ।

और उससे एक बात की माँगा अनुमति,
मना ना करना,करता हूँ एक विनती ,
मै तुम्हे बहुंत प्रेम करता हूँ,
सुन ये,वो मुझे रहे एकटक देखती ।

मुस्कुरा कर वो,बस इतनी ही कही
ये बातें कहने मे ,इतनी देर क्यो लगा दिये
कब से मै,तेरे इजहार का था इन्तेजार
हाँ है हाँ, मुझे भी है तुमसे बेहद प्यार ।

चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड

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