
मेहनत मजदूरी करके वह
पेट कुटुंब का भरता है
सुबह से शाम तक श्रम करके
वह तनिक भी उफ्फ़ न करता है ।
पीठ पर अपने कर्जा लादे
सिर पर ईंटें धरता है
कठिन परिश्रम के बल पर
गरीबी से वह लड़ता है ।
पाई-पाई रोज जोड़कर
दुर्दिन के वह कमर तोड़कर
पसीने से तो रोज नहाकर
बाधा – विघ्न वह हरता है ।
मजदूर तो मजबूर रहा है
विपदा से वह सदा लड़ा है
कठिन परिश्रम से विकास की
सदा नींव की ईंट रहा है।
नागेन्द्र त्रिपाठी
गाजियाबाद/वाराणसी उत्तर प्रदेश ।











