
मेरे गीत का विषय गीतिका तुम ही हो।
मेरी प्रेम कश्ति की खेवईया तुम ही हो।।
पार लगा दो नाव गर प्यार करती तुम,
मेरे जीने का केवल सहारा तुम ही हो।।
प्रेम करो तो ये प्यार पावन बन जाएगा।
मेरे मरू मन रिमझिम सावन आ जाएगा ।।
लिख ले प्रीत कि हम मोहक कहानी कोई,
इस घने तम की जीवन ज्योति तुम ही हो।।
ये वक्त खड़ा है बाहें फैला कर सुनो।
ये प्रेम के पुष्प है मन लगाकर चुनो।।
ये वक्त गया तो नहीं आएगा दोबारा,
मनहर मधुमास की मोहक फिजा तुम ही हो।।
गीतकार मनोहर मधुकर











