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अन्नदाता या कर्जदाता

अन्नदाता उसको हैं कहते
जो खेत में उपजाता अन्न
भरता है हर व्यक्ति का पेट
धूप में तपता, बारिश में भींगता
नहीं करता कभी मौसम का परवाह
मेहनत कर धरती से सोना उपजाता
सुबह सवेरे हल कन्धे पे ले निकल पड़ता खेत
बैल को हांकते -हांकते खेत जोतते
हो जाती शाम
बहते पसीने से सींचता है खेत
तब मिलती है हमें खाने को रोटी
पर उसी अन्नदाता को करते हैं
सभी परेशान
महाजन सूद पर सूद उन पर चढ़ाए जाता
बीज मंहगे, पौधे मंहगे, खाद महंगी
उसे पर बिजली का चढ़ता बिल
बिटिया के ब्याह को लिया कर्ज
ब्याज पर ब्याज चढ़ता गया कर्ज
मंडी में बेचने फसल लेकर जाता
दलाल बीच में भाव लगाकर चांदी काटता
और गोदाम में सड़ जाता है सारा फसल
टीवी पर नेता कहते’ किसान है महान’
किसान सोचता’कब मिलेगा फसल का दाम’
अरे सुनो , दुनियां वालों, अन्नदाता रोएगा
तो देश के निवासी रोएंगे
जिस दिन किसान हल नहीं जीतेगा
उस दिन देश भूखा रह जाएगा
सिर्फ और सिर्फ ‘किसान दिवस’
मनाना, महज एक दिखावा है
हमें सोचना होगा कि किसान को
अन्नदाता ही रहने देना है
कर्जदाता नहीं बनने देना है

डॉ मीना कुमारी परिहार

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