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बारिश और तुम

जब भी बरसती हैं ये बूँदें,
मन के आँगन में कुछ खिल जाता है,
जाने क्यों तुम्हारा नाम,
हर फुहार के संग मिल जाता है।

भीगी-भीगी सी ये हवाएँ,
तेरी यादों का संदेशा लाती हैं,
जो बातें कभी कह न पाए,
वो बारिश चुपके से सुनाती है।

बादलों की ओट से झाँकता आकाश,
जैसे तेरी मुस्कान का दर्पण हो,
हर बूँद में तेरा ही चेहरा,
हर मौसम तेरा समर्पण हो।

जब बारिश गालों को छूती है,
लगता है तुमने स्पर्श किया है,
सूखे पड़े इस मन को ,
जैसे प्रेम का अमृत-वर्षा दिया है।

कुछ बूँदें आँखों में उतरती हैं,
कुछ दिल में घर कर जाती हैं,
कुछ यादें बनकर जीवन भर
चुपके-चुपके मुस्काती हैं।

बारिश सिर्फ पानी नहीं होती,
ये भावों की एक सरिता है,
जो मन की धूल हटा देती,
और प्रेम की ज्योति भरती है।

आज फिर सावन गुनगुनाया,
आज फिर मन भीग गया,
बारिश तो बस बहाना थी,
तुम्हारा एहसास ही मेरे भीतर बूँद-बूँद उतर गया।

नेहा कुमारी

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