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मेरी अभिलाषा

मेरी बस अभिलाषा है कि,
मेरे देश में खुशहालीं आये।
भुखमरी गरीबी मिट जाये,
जीवन में हरियाली आये।।

मेरी बस अभिलाषा है क़ि,
देश धन धान्य से भरा रहे।
कृषकों की दूनी आय बढ़े,
औ हरी भरी सदा धरा रहे।।

मेरी बस अभिलाषा है कि,
देश के शहीदों को मान मिले।
देशहित में जिसने काम किये,
उन्हें यथोचित सम्मान मिले।।

मेरी बस अभिलाषा है कि,
सब में समरसता भाव रहे ।
सब प्रेम पूर्वक साथ चले ,
सब में सर्वधर्म सद्भाव रहे।।

मेरी बस अभिलाषा है कि,
कोई रहे न वंचित शिक्षा से।
चहु दिश बहे ज्ञान की गंगा,
सब जीवन जिए सुरक्षा से।।

भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’
शिक्षक सह साहित्यकार
इटावा उत्तर प्रदेश
दूरभाष 7017777083
ईमेल : prashantunorg@gmail.com

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