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विश्व माता पिता दिवस

माँ ममता की मूर्ति अनुपम, पिता धैर्य का आधार।
इनके चरणों में बसता है, जीवन का सारा संसार॥

माँ की गोदी प्रथम पाठशाला, स्नेह सुधा बरसाती है।
पिता तपस्या कर जीवन में, सुख की राह दिखाते हैं॥

माँ के आँचल की छाया से, हर पीड़ा दूर हो जाती।
पिता के दृढ़ संकल्पों से, मंज़िल स्वयं पास आ जाती॥

माँ प्रार्थना की पावन गंगा, निर्मल प्रेम प्रवाह है।
पिता हिमालय-से अटल खड़े, जीवन की सच्ची चाह है॥

अपने सपनों को त्याग सदा, संतानों को उन्नत करते।
हर संकट में ढाल बनें वे, सुख के दीप निरंतर धरते॥

मातृ-पितृ का मान रखो तुम, यही धर्म का सार है।
इनकी सेवा से बढ़कर जग में, न कोई पुण्य अपार है॥

मातृ-पितृ दिवस पर मिलकर, श्रद्धा सुमन चढ़ाएँ हम।
उनके त्याग, समर्पण, प्रेम का, जीवन भर गुण गाएँ हम॥

इनके आशीषों से महके, जीवन का हर एक प्रहर।
मातृ-पितृ के चरण-कमल हैं, सुख-समृद्धि के शुभ सागर॥


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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