Vijay Kumar
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साहित्य
ग़ज़ल
आँखों में नींद अब उतर जाएगी,वक्त गुज़रा है जो, अब गुज़र जाएगा। भीड़ में तन्हा था, शोर थमने लगा,दिन था…
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साहित्य
संत कबीरदास के ज्ञानमार्ग, कटु सत्य अमृतवाणी और वर्तमान में उसकी प्रासंगिकता
आलेखः “पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥” 600 साल…
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साहित्य
मेरे इंसाफ़ की अधूरी कहानी
मैं एक आम इंसान हूँ। नाम छापना ज़रूरी नहीं, क्योंकि ये कहानी सिर्फ मेरी नहीं है। ये हर उस शख्स…
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साहित्य
आषाढ़ के बादल
यह फितूर हि तो है,तो है किसका,लोग उसे पहचानते नहीं हैं बिन पिए झूमके निकलता है बादल , यह कैसा…
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साहित्य
सदाचार व्यवहार व्यक्तित्व निखारते
महत्वकांक्षा कर्तव्यशीलता परही जब भारी पड़ने लग जाती है,महत्वाकांक्षा तभी जीवन हताशाऔर निराशा में बदल जाती है । कर्तव्यपरायणता जब…
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साहित्य
मैं बन गया विधायक –
वीर रस संस्करणकविता हां मैं खलनायक नहीं नायक हुंहां मैं बहुत बड़ा नालायक हूंक्यों की मैं बन गया विधायकलोगों कि…
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साहित्य
प्रेम; अदृश्य सेतु
प्रेम उस वृक्ष का नाम नहीं जिसकी जड़ें स्वार्थ की मिट्टी में पलती हों। वह तो आकाश में उगने वाला…
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साहित्य
बारिश
मौसम बदल गयानभ में मेघ छा गयाठंडा हवा बह गयापेड़ पौधों काँप गया। मेघ काले बन गयाविद्युत चमक गयावर्षा जोर…
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साहित्य
कर्म ही भाग्य का विधाता
_गंगा नहाने से कोई निर्मल नहीं होता,दुखी जन श्राप से कोई निर्मल नहीं होता।हमारे भाग्य का यदि कर्म से होता…
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साहित्य
सुविचार
मेरा वतन है यहां मेरा मन है यह मन में निरंतर क्रिया और प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है। प्रतिक्रिया में विरोधाभास…
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