Vijay Kumar
-
साहित्य
भौर-काल की देवी
लिख लूंगा मन के भावउन्हें शब्दों सेअलंकारों से सजा लूंगातुम भावाभिव्यक्ति की ऊर्जा होतुम रहती हो मोनमेरे भाव, मेरे शब्द…
Read More » -
साहित्य
अभिव्यक्ति या अफवाह की फेक्ट्री
अफवाहों का दौर चल रहा है साहेब अफवाहों से दूर रहिएगा। क्योंकि यहाँ फंसाना सब जानते हैं लेकिन फैसला करना…
Read More » -
साहित्य
स्कूल चले हम
स्कूल चले हम,स्कूल चले हमतैयार होकर,देखो स्कूल चले हमकिताब,बैग,कॉपी, कलम लेकर हमस्कूल चले हम,स्कूल चले हम। हमसबो के वास्ते,स्कूल है…
Read More » -
साहित्य
अब भी निकलता है क्या चाँद?
अब भी निकलता है क्या चाँद? तारों को देखे सदियाँ बीत गईं। आसमान अब दिखता ही नहीं, लगता है उसे…
Read More » -
साहित्य
महंगाई का तड़का
एक हास्य कविता सब्ज़ी वाले ने भाव बताया, सुनकर चक्कर आ गयाटमाटर सोने से महंगा, आलू भी शरमा गयापत्नी बोली…
Read More » -
साहित्य
बेफिक्र हूं इसलिए
बेफिक्र हूं इसलिए कि आईना सा किरदार है मेरा।फिक्र उन्हें होती है अक्सर,जिनके चेहरे पर लगा होता एक और चेहरा।यहाँ…
Read More » -
साहित्य
मैं बाबा की बिटिया हूँ।
विधा -गीत मैं बाबा की बिटिया हूँ,सोन चिरैया हूँ।आँगन की खुशबू हूँ,बाबा का विश्वास हूँ,घर की पुरवइया हूँ।मैं बाबा की…
Read More » -
साहित्य
कल रात सपने में सपना आई
कल रात सपने में सपना आई,कल्पना को साथ लिए।कुछ यादों के दिन तो कुछ,वादों की सौगात लिए। वही दिन, जिसमें…
Read More » -
साहित्य
हंसीन सपने
एक सपना मैंने डिलीट कर दिया,,, औरएक सपना आपने डिलीट कर दिया,, दौनो सफल हो गए,,, कविता से सपनों को…
Read More » -
साहित्य
स्वदेश की मिट्टी
स्वदेश की मिट्टी पुकार रही,आओ मेरा मान बढ़ाओ।प्रेम, परिश्रम, साहस लेकर,भारत का भविष्य सजाओ॥ मैंने वीरों को जन्म दिया है,मैंने…
Read More »









