Vijay Kumar
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साहित्य
वक्त निर्देश शिरोधार्य कर रहा हूँ
कविता लिखना अब शौक़ बन गया है,रचना करने का जुनून पैदा हो गया है,अपने मन कि बात ही तो कह…
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साहित्य
हिंदुत्व और साजिश
राम मन्दिर और घोटाले पर विपक्षी हल्ला जैसे रंग बदलते गिरगिटपहले राम मन्दिर निर्माण के खिलाफ अब चंदा घोटाले पर…
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साहित्य
उलझन मे हूँ
कुछ ख्वाब है मेरे,न जाने कब होगे पूरे ?प्रयास तो है जारी,फिर भी है अधुरी। अपने ही लगा दिये हैं…
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साहित्य
जब मिलेगी तुम
जब मिलोगी तुम जो हमसे, तो प्यार करेंगे,होंगी बातें भरपूर, दिन-रात करेंगे। तेरी मुस्कुराहटों पर हम छिड़कते हैं जान,तू जो…
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साहित्य
तेरे दर पे पुजारी बन के आए हैं
हम सब के तो प्राण तुम्हीं हो देने वाले त्राण तुम्हीं होगायत्री की मधुर साधना श्रद्धा प्रज्ञा कल्याण तुम्हीं होज्ञान…
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साहित्य
भक्त के भेष में चोर
राम का मंदिर बन गया तोकुछ लोगों की नींद उड़ गईचंदा, घंटा, दान पेटीरातों-रात गायब हो गई भक्त बनकर आए…
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साहित्य
प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक
द्वन्द्व देश में बढ़ रहा, युवा सभी गतिवान।समझें नहीं महत्व को,करते पाप महान।संस्कृति कैसे है बचे,इस पर करें विचार,कृपा करो…
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साहित्य
चलो कल को कला में कुछ बना कर दिखाएं
कलम से कलाकार हों जाएं,वो वक्त था जब,अनसुनी कहानियां सुनाते थे लोग, आज वक्त हाथ में है,, कलम साथ में…
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साहित्य
खुर्जा के वरिष्ठ कवि डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी ” मातृभाषा साहित्य भूषण सम्मान ” से किए गए सम्मानित
दिनांक 30 जून 2026 को मातृभाषा काव्य मंच के तत्वावधान में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। आयोजन में…
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साहित्य
कृतज्ञता के पुष्प
हे प्रभु! तेरा हर पल मुझ पर अनुपम उपकार है।तेरी कृपा से ही जीवन का सुंदर संसार है। सूरज की…
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