Vijay Kumar
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साहित्य
संघर्ष पथ
जब जीवन की राहों पर मैं,अपनी ही धुन में चलता था।सपनों की रंगीन गलियों में,हर पल हँसता, हर पल पलता…
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साहित्य
चम्बल के किनारे शिव से संवाद
मुझे मिला है चम्बल नदी का किनारा,भगवान शंकर का सहारा,लहरें करती जलाभिषेक,भोले का ये द्वार है प्यारा।चम्बल मैया की गोद…
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साहित्य
छल
मत देखो चेहरे की चमक, हर चेहरा सच्चा नहीं होता,हर मुस्कान के पीछे छिपा, दिल का किस्सा नहीं होता। मीठी…
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साहित्य
तूं हीं दिन और रात है
तूं हीं दिन और तूं हीं रात है रे कन्हैयातूं हीं जग सारा कायानात है रे कन्हैयाबोलों हरे रामा बोलों…
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साहित्य
माँ का भरोसा
रिश्तों में जब भरोसा होता है,जीवन और भी सुंदर होता है।कितने ही विषधर पलते हैं यहाँ,मन भी तो एक बाँह…
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साहित्य
दुनियाँ
बहुत बड़ी ये दुनियाँ है तेरी प्रभु दूर तलक इंसानों की भीड़ ही भीड़ नज़र आती हैइस भीड़ मे मेरा…
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साहित्य
3 जुलाई 2026:अंतराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस
प्लास्टिक का क्यों इतना प्रयोग हो रहा है?धरती पर क्यों इतना अन्याय हो रहा है।।जिसका दुष्प्रभाव बढ़ता जा रहा है।धरती…
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साहित्य
गीत
ज्यादा कुछ नहीं चाहता मैं,मैं तुम से प्यार करूं मुझे खुश रखने को सनम,,,तुम मेरे सामने ही रहना,,, मैं आईना…
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साहित्य
सुख़न का आशियाँ द्वारा आयोजित ऑनलाइन राष्ट्रीय साहित्यिक संगोष्ठी
“ब्रह्म शब्द से लोक स्वर तक” यह संगोष्ठी संत कवि कबीरदास जी एवं जनकवि बाबा नागार्जुन की जयंती के पावन…
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साहित्य
ज़िंदगी अब भी वैसी ही है
ज़िंदगी अब भी वैसी ही है, जैसी पहले थी, बस थोड़ा-सा वक़्त बदला है, और थोड़ा-सा मैं। पहले अकेला था,…
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