Vijay Kumar
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साहित्य
मैं मीरा श्याम
मैं मीरा श्याम तुझमें ऐसी खो गई,देखी तेरी मूरतिया बस तेरी हो गई | न बनना चाहूं गोपी,न रुखमणी, राधा,मैं…
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साहित्य
मानसून के रंग निराले हैं,
मानसून के रंग निराले हैं,हर बूंद में सौ उजियाले हैं,सूखी धरती की प्यास बुझाकर,ये जीवन के नए हवाले हैं। कभी…
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साहित्य
भ्रष्टाचार
देश मे नियम कानूनों की भरमार हैकारण आकन्ठ डूबा भ्रष्टाचार है जीना आम आदमी का बेकार हैगर वो कर्म से…
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साहित्य
वक्त का मान और सम्मान
मानव जीवन में मित्र हमेशामिलते और बिछुड़ते रहते हैं,वैसे ही वक्त सदा इस जीवन में,उतार चढ़ाव ले बदलते रहते हैं।…
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साहित्य
विश्व हिन्दी परिषद की अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठी में गूँजी हिंदी, नारी शक्ति और विश्व शांति की स्वर-लहरियाँ
भगवान दास शर्मा “प्रशांत”संवाददाता नई दिल्ली विश्व हिन्दी परिषद के तत्वावधान में 27 जून 2026, शनिवार को रात्रि 8 बजे…
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साहित्य
तू कबीर मैं कबीर
डाक्टर दीपक गोस्वामीमानवीय व्यबहार वैज्ञानिकआप देश के चर्चित लेखक,मोटिवेशनल स्पीकर, ट्रेनर,सामाजिक कार्यकर्ता है। तू कबीर मैं कबीर, हर एक भूखा…
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साहित्य
आतंक
वह जब जन्म लिया तोसामान्य बच्चों जैसा ही थाधीरे धीरे बड़ा हो रहा थाएक आम बच्चे की तरहपरंतु धार्मिक शिक्षा…
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साहित्य
हमको मौका अगर जो मिला
हमको मौका अगर जो मिला?प्रेम,शांति का पुष्प देंगे, खिलाजग मे रहते है,लोग जितनेबातें उनसबो से है,यही कहने कि,घृणा,लोभ,अहम् मिटाओप्रेम,शांति ,…
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साहित्य
जल्दी ही लौटूँगा.
[आ. ड़ा. पदम सिह जी (सिंह पुर- करहल) के आमंत्रण पर]जल्दी ही लौटूँगा, मैं- गाँव तुम्हारे।ना- मैं भूला हूँ, ना-…
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साहित्य
पारिवारिक साहित्य प्रकोष्ठ ने पंकज बुरहानपुरी के सम्मान में काव्य गोष्ठी आयोजित की
जबलपुर - जबलपुर संस्कारधानी में पंकज बुरहानपुरी ( डॉ यमुना प्रसाद दुबे ) गंगा जमुना के तट से पधारे वरिष्ठ…
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