Vijay Kumar
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साहित्य
ज्ञान ध्यान भंडार है काशी
वसुधा का सिंगार है काशी,ज्ञान ध्यान भंडार है काशी! बहती जहां गंग की धारा,जिसका पावन कूल किनारा!अर्धचंद्र शिव के माथे…
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साहित्य
कविता
अपने हि दांतों ने, अपनी हि जिभ काट ली,, चटकारे ले ले कर चूसने लगे जब हम उंगलीयां तो अचानक…
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साहित्य
पिया मिलन की आस
( मीरा की विरह – भावना पर आधारित)घुंघरू बांधे पांव में मीरा नाचे आज,मन में बस गिरधारी बसे तन पर…
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साहित्य
नही डर रहा भगवान का
कलयुग के इस कालखंड में मतलब का है जोरजबतक मतलब सिद्ध तबतक सबआपकी ओरमैं भी कौन सा दूध का धुला…
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साहित्य
जाति का ज़हर
जाति का ज़हर नफ़रत बोता,इंसानों को इंसानों से तोड़ता।जो धरती सबकी माँ कहलाती,उसी पर दीवारें खड़ी कर जाता। न कोई…
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साहित्य
माँ की सिलवटें – एक उम्र का हिसाब
माँ के आँचल में जो सिक्के बंधे मिलते थे,वो सिक्के नहीं थे, उसकी दुआएँ थीं।हम समझते थे गरीबी है घर…
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साहित्य
सजल – कृष्ण भक्ति
महालक्ष्मी छंद आधारितमापनी – २१२ २१२ २१२समांत – आने | पदांत – लगे श्याम की धुन सुनाने लगे,भक्त मन को…
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साहित्य
संयम उपकरण मयूर पिच्छिका
महावीर के लघुनंदन उत्तम करूणा के धारी हैं,जीवों का रक्षण करते मुनिवर ये परम उपकारी हैं,छोटे छोटे प्राणी को सहला…
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साहित्य
आईने सी हूँ मैं,
आईने सी हूँ मैं,हर टुकड़े में एक कहानी है,कुछ सपनों की राख बची है,कुछ यादों की निशानी है। हँसती हूँ…
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साहित्य
इंसान में साक्षात भगवान समाएं हैं
एक बात बोलूं साहेब,माना कि इंसान में भगवान समाएं होतें हैं, लेकिन फिर भी हम इंसान ही इंसान को पत्थर…
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