Vijay Kumar
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साहित्य
अपनों को भूल गया
दर दर ठोकर खाता प्राणी, सच्चे मार्ग को भूल गया,जीवन ही एक यज्ञ है प्यारे, करना हवन को भूल गया।…
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साहित्य
मेघ , बादल , घन
विधा : पद्य चहुॅंओर है घन घना ,भानू का प्रकाश मना ,चहुॅंओर बिजली कड़क ,दिवा भी उदास बना ।विजयी हो…
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साहित्य
वृद्धाश्रम बढ़ते क्यों जा रहे
आज ये सवाल उठाए जा रहेवृद्धाश्रम बढ़ते क्यों जा रहेकभी आपने सोचा है..?बेटा पढ़- लिख कर विदेश चला जाताबड़ा पैकेज…
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साहित्य
प्रेम : समर्पण से दिखावे तक
जो छोड़कर जाने वाला हो,वह एक दिवस चला जाता है।रोक सकोगे कैसे उसको,जो पहले ही मन से जाता है। वह…
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साहित्य
आदित्य तुम नीरस लगते हो
हर कविता रचना के साथकवि को तस्वीर बदलना है,हर खासो आम अवसर परअपना परिधान बदलना है। लोग कहते हैं कि…
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साहित्य
जिंदगी के कुछ महत्वपूर्ण बातें।
दलालों के बस्ती में बिकता तो हर इंसान है साहेब लेकिन बिकता तो वही है जो बेचता अपना इमान है…
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साहित्य
जिंदगी हसीं थी
जिंदगी हसीं थीतुम नाज़नीं थीएक हसीं तुम्हारी जानलेवा थीशहर की दिलकश सुकुनी एक हवा थीलहराती ज़ुल्फ़ों के सायें तले तेरा…
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साहित्य
बाप की दुआ
अपने पापा के लिए रुक के दुआ करता हूँ,देखता हूँ मैं जहाँ कोई खिलौने वाला।सोचता हूँ बचपन में जो मांग…
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साहित्य
आहट° ° ° ° ° °
अब मिथ्या व्यवहार का हो चला है बोलबालामिथ्याचार जिस ने न सीखाधक्के खाए नित्य… जग में रह जाए अकेला।सत्य व्यवहार…
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साहित्य
गीत
मोहन ले चल नदियां पार।पाए अब जीवन का सार।।पढ़ले प्रेम के ढाई अक्षर,खुल जाएं आनंद का द्वार।। साथ तेरा सुंदर…
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