
दलालों के बस्ती में बिकता तो हर इंसान है साहेब
लेकिन बिकता तो वही है जो बेचता अपना इमान है साहेब
क्योंकि खरीदने वाला उसीको खरीदता है जो बेचता अपना इमान
क्योंकि बैमान ही बैमान को खरीदता है यही तो दलाली का नाम है
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













