
आज ये सवाल उठाए जा रहे
वृद्धाश्रम बढ़ते क्यों जा रहे
कभी आपने सोचा है..?
बेटा पढ़- लिख कर विदेश चला जाता
बड़ा पैकेज है मां, का हवाला देता
बेटी ब्याह कर ससुराल चली जाती
वो कहती मां मुझे माफ करना, मुझे
सास- ससुर को रखना पड़ा
समय का पहिया बदल गया, सोच बदल गई, कमरे छोटे पड़ गए
सारे रिश्ते फ्लैट के चलन से टूट गए
3 बीएचके में एसी, एलइडी, सोफा
डाइनिंग तो आ गया
पर आप बुजुर्गों के लिए एक कोना भी नहीं बचा
पापा आप टीवी की आवाज धीमी कर दो
मुन्ना सो रहा है, मां आप किचन में
मत आया करो, प्रियंका को दिक्कत होती है
बात-बात पर टोकना, हर बात में तान देना
मानों घर जेल का कोना हो गया
पेंशन से बिजली का बिल भरा
कुछ बचत के पैसे से पोते की फीस भरी
बदले में मिला अपमान, उपेक्षा
बुजुर्ग बोझ नहीं होते, वो तो घर की नींव होते हैं
बुढ़ापे का दर्द वही समझ सकेगा
जिसने बचपन मां की गोद का सुख पाया है
डॉ मीना कुमारी परिहार













