Vijay Kumar
-
साहित्य
बेघर
अचरज है यहाँ जिनका कोई घर है न द्वार है,वो पूछते फिरते हैं अभी कितनी दूरी पार है। ठिकाना उन्हें…
Read More » -
साहित्य
फकीर और दुनियाँ
फकीर हूँ दुनियाँ अहसास करा देती हैदो कौड़ी की हैसियत थूककर हमे जता देती है समय सबका खराब आता हैकौड़ियों…
Read More » -
साहित्य
पिता दिवस पर समर्पित
पिता दिवस पर सादर श्रद्धांजलि,माता पिता को आज समर्पित हैं,श्रद्धासुमन अर्पण परिवार कर रहा है,आपके आशीष से सौभाग्य निर्मित हैं।…
Read More » -
साहित्य
इंदौर की साहित्यकार कल्याणी गुप्ता कृति कल्प भेंटवार्ता पत्रम से सम्मानित।
कल्प भेंटवार्ता मंच पर कृष्णनंदन भगवान प्रद्युम्न चतुर्थी मनाई गई। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित…
Read More » -
साहित्य
गजल
काफिया —- अर की बंदिशरदीफ—- देखो। बहर— 222—222—22=16 खुश हूँ आज बताकर देखो,मधुवन में तो आकर देखो। समय यही आया…
Read More » -
साहित्य
आग लगा देता था पानी में”
कुछ गलतियाँ हुई हैं मुझसे नादानी में,मैं बुरा हूँ, कुछ लोगों की कहानी में। बचपन तो, राजकुमार सा बिता मेरा,शायद…
Read More » -
साहित्य
सुनील कुमार खुराना की सोच शासन की सत्ता में महिलाओं की भागीदारी जरूरी
महिलाएं परिवार में अनेक प्रकार की भूमिका निभाती है। महिलाओं में विश्वास दूरदर्शिता, उत्साह होता है। प्रतिनिधित्व करने की सभी…
Read More » -
साहित्य
प्रेम
प्रेम कहा महंगे गिफ्ट मांगता है..प्रेम तो वक्त मांगता है…तमाम व्यस्तता के बीचये कहना तुम याद आ रहे होमांगता है..चाय…
Read More » -
साहित्य
पिता के कंधो पर चड़कर जो अपने घर बसाते हैं!
सच पिता को भुलकर आजकल बेटे सिर्फ जवांई हो जाते हैं!जन्मदाता से पत्नि प्रदाता बेटो कि नजर में बड़ा हैं!…
Read More » -
साहित्य
जिंदगी के कुछ महत्वपूर्ण बातें
अच्छे कर्म करने का खाता तो खोलिए साहेब शून्य से ही सही अंक अपने आप बढता जाएगा क्योंकि जरूरत है…
Read More »









