Vijay Kumar
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साहित्य
मैं आत्मा
मैं,आत्मा,,आत्मा ही परमात्मा, ।।,,,,,,,,,,,,, ,,,,,,,,, ,,,,,,,,,,,,मैं हूं ब्रह्म तत्व अविनाशीमैं हूं ब्रह्म तत्व से जन्मा । मुझे जाना है, उसी…
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साहित्य
जिंदगी
जिंदगी को हम अक्सर उम्मीदों, सपनों और खुशियों के रंगों से सजाकर देखते हैं। हमें लगता है कि मेहनत का…
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साहित्य
जन गण मन गाते हैं हम
पिता देवेंद्र नाथ और माता शारदा देवी के पुत्र थे रवीन्द्र नाथ टैगोर जीगीत, संगीत, काव्य और ज्ञान केसच्चे वाहक…
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साहित्य
वीर सैनिकों की वीरता को सलाम
ऑपरेशन सिन्दूर से बजी रणभेरी,अब नहीं करेंगे हम और कोई देरी,दुश्मन के अंदर घुस कर हम मारेंगे,पुलवामा, पहलगाम के बदले…
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साहित्य
मैं जो भी हूँ, जैसा भी हूँ
परमपिता परमेश्वर की महिमा,मानव का जीवन देकर भेजा है,उसको शत शत नमन, प्रणाम है,कोटिश: ईश्वर का धन्यवाद है। चाहत नहीं…
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साहित्य
गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर
विधा :काव्य रवीन्द्र का स्वर, गूंजे हर मन में,शब्दों में जैसे संगीत सजा।कोलकाता की उस धरती से,एक ज्ञान-सूर्य जग में…
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साहित्य
रविंद्र नाथ टैगोर
मां माटी मानुष अवतारजन्मदिन है आज जिनकावे है रविंद्र नाथ टैगोरहम श्रद्धा वनत बारंबार गीतांजलि के महान रचनाकारकवि चित्रकार एंव…
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साहित्य
भावों का सागर या समाज की भ्रांति?
स्त्री की संवेदना को कमजोरी समझा जाए या भावों का अथाह सागर—यह प्रश्न जितना सरल दिखता है, उतना ही गहरा…
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साहित्य
दिमाग घुटनों में? — एक सोच का आईना
“लड़कियों का दिमाग घुटनों में होता है”—यह वाक्य सुनते ही प्रश्न उठता है कि इसे हल्का-फुल्का व्यंग मानें या नासमझी…
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साहित्य
परीक्षा परिणाम और जिंदगी
मानव का यह जीवन जिसे ईश्वर ने सृष्ट किया है , यह जीवन बुद्धिजीवी, सुसभ्य और कर्मनिष्ठ होता है ,…
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