Vijay Kumar
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साहित्य
गवां बैठे!
वो ज़माने हम गंवा बैठे,वो ख़ज़ाने हम गंवा बैठेआज कुछ नहीं जोड़ने को,सलीक़े पुराने हम गंवा बैठे।। महफ़िलें तो सजी…
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साहित्य
हिंदी के गौरव-गान से गूँजी कल्पकथा की 264वीं काव्यगोष्ठी, राष्ट्रभाषा चेतना ने रचा साहित्यिक उत्सव
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु…
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साहित्य
घर-घर श्री गणेश
हम सब अपने घर मिट्टी के गणेश ही लाए |ताकि पर्यावरण की सुरक्षा हम कर पाए |नदी में न विसर्जित…
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साहित्य
कविता
जीवन उपयोगी बनी, भाषा है अनमोल।पावन कालिन्दी सरिस, मधुरिम इसके बोल।स्वर्णिम प्रत्यूषा लिए, समरसता का भाव,दीप्तिमान सारा जगत, हिय पट…
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साहित्य
वक्रतुंड
शीर्षक – वक्रतुंड आए मेरे द्वार वक्रतुंड आए मेरे द्वार,लेकर मंगल की बहार।गूँजे जय-जय गणपति नाम,रोशन हो मेरा संसार। सिंदूर…
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साहित्य
हिंदी : भावनाओं का सेतु
“हिंदी : भावनाओं का सेतु” भाषा मनुष्य के विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। संसार…
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साहित्य
लोग
किस कल का निर्माण करेंगेबेघर भूखे नंगे लोग कफ़न हुयी चेहरों की रंगतमरघट सी घर की बुनियादेंगाँव डूबते सैलाबों मेंधुआँ…
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साहित्य
ग़ज़ल
समय के फल नहीं भूले।ख़ुशी के पल नहीं भूले। समझदारी रखी हमने,जो बीते कल नहीं भूले। पहुँच कर इस ऊंचाई…
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साहित्य
माता का दरबार
ताटंक छंद मातु तुम्हारे दर्शन को सब ,भक्त दूर से आते हैं।मनोकामना पूरी हो माँ ,तुम से आस लगाते हैं।।आई…
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साहित्य
कविता
सूना कर घर बार कहाँ मुँह मोड़ चलेपंछी तो अब नीड़ हमारा छोड़ चले आँगन चौखट दरवाज़े देखें रस्तासबसे रिश्ते…
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