Vijay Kumar
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साहित्य
हम और हमारे संस्कार
ओम कश्यप संस्कारों की छाँव में, जीवन फूल-सा खिलता है,मर्यादा का दीप जहाँ, हर आँगन में मिलता है। बड़ों का…
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साहित्य
चाय की चुश्की।।
जब सुबह सवेरे हम उठते,पहेले चाय की चुश्की लेते।फिर दिनभर का प्लान बनाते,काम के लिए हम तैयार होते।। जब घर…
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साहित्य
विलायती बाबू।।
भैया हमारे शहर गये,पढ लिखकर बाबू हुये।गाँव,धरा से दूर हो गये,वो संस्कारों को भूल गये।। अंग्रेंजी में नित बाते करते,मातृभाषा…
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साहित्य
समय का फेर
मुफलिसी का आलम है साया भी खुद से परहेज़ करने लगा हैजहालत ही दुनियाँ मे साब पाई पाई का हिसाब…
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साहित्य
अनपढ़ गाँव का छोरा,
अनपढ़ गाँव का छोरा,गौमाता संग खेत गया,शहर पढ़ा जो बाबू बनकर,अपनी जड़ों से दूर गया। अब अंग्रेज़ी में ज्ञान बाँटे,“कल्चर”…
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साहित्य
सूर्य देव की कृपा: गर्मी का उपहार
सूर्य देवता की कृपा बनी है,गर्मियों का उपहार है मिला,घर के अंदर रहने की मस्ती,गर्मी से बचने का उपाय मिला।…
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साहित्य
मानव जीवन
मानव जीवन भंवरों से भर पड़ा हैवह निरंतर एक जैसे नहीं होता हैऋतु चक्र के अनुसार बदलती हैकुछ समय हर्ष…
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साहित्य
तेरी बांसुरी के धून
जमुना तट पर बांसुरी बजाकर क्यों मुझकों बुलाता है।सुन कन्हैया रे तेरी बांसुरी के धून से बड़ा सुकून मिलता है।।राधे…
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साहित्य
पकाते हैं जनाब
सुबह-सुबह अलार्म से नहीं, चाय से उठते हैं जनाब,आँखें खुलें या न खुलें, पहले “चाय” पूछते हैं जनाब। घर में…
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साहित्य
गीत
आ चांद बादल से निकल के।मीत इधर आएगा चल के।।पागल मनवा राह देखे,आंख से अश्रु धारा छल के.. पथ पथरिला…
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