Vijay Kumar
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साहित्य
गणतंत्र दिवस
गणतंत्र का यह पावन दिवस,इतिहास नहीं — एक जीवित विचार है,जहाँ नागरिक केवल शासित नहीं,राष्ट्र की आत्मा और अधिकार है।…
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साहित्य
गणतंत्र दिवस
तिरंगा झूम कर नभ में, नया पैगाम लाया है।शहादत की बदौलत आज, ये प्यारा दिन आया है। नज़र में शान…
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साहित्य
शहीदों की विरासत
हमने आज़ादी यूँ ही नहीं पाई है,ये किसी दस्तख़त की रुसवाई है। ये किसी तारीख़ का जश्न नहीं है,ये लहू,…
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साहित्य
तिरंगा देश की आन ,बान, शान
तिरंगा है हमारी पहचान। इसकी शान में है हिंदुस्तान। लहराता है आसमान में तीन रंग। दिल में भर देता है…
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साहित्य
दादा के वैवाहिक सालगिरह
विधा : भोजपुरी हास्यआईल विचार दादा के मन में ,खुशी दउड़ल दादा के तन में ।दादी सुनवलन आपन विचार ,फेर…
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साहित्य
गणतंत्र दिवस समारोह
" हम गणतंत्र भारत के निवासी सुनते हैं अपनी स्वाभिमान की वाणीदुनियां की कोई फिक्र नहींजहां संविधान करता है देश…
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साहित्य
कहानी :फूल और भंवरा
एक चांदनी रात से सजे उस जादुई बाग में, जहां हर पत्ता प्रेम की सांस लेता था और हवाएं दिलों…
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साहित्य
वक्त कैसा भी हो
वक्त कैसा भी होवक्त कैसा भी होराही आपना कर्म , करता चल।अच्छे वक्त में अपने आपको,अहंकार के सागर में न…
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साहित्य
मै हूँ एक मतदाता
25 जनवरी मतदाता दिवस को समर्पित)मै हूँ एक मतदातामै ही हूँ भारत भाग्य विधातामै निर्माण करता हूँ संविधान रचियतामै हूँ…
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साहित्य
पहेली
जिंदगी वह पहेली हैसुख दुःख की सहेली हैं।बे-तहाशा ठोकरें खाकर,ख़ुद को तराशने की जिद्द,आज चढ़ पढ़ी है।सब-कुछ छोड़ – छाड़ने…
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