Vijay Kumar
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साहित्य
अंतर्मन का युद्ध
नाकामयाब हूँ मैं, व्यर्थ समझता हूँ खुदको, दुनिया के ताने सुन–सुन रोता हूँ खुदको। उस बंद कमरे की बातें मैं…
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साहित्य
भ्रम से मुक्ति
चल-अचल सब पल में छीना,भ्रमित मन भ्रम में ही जीना।सकल चराचर जग का धन था,जग ने ही वापस ले लीना॥…
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साहित्य
नियम ,दंड और छूट
जीवन एक सफ़र,नियम इसकी राहें,तोड़ोगे जो राहें,मिलेगा दंड भरोगे आहें! पर क्षमा भी है साथी,देती छूट की आस,ये तीन धागे…
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साहित्य
वृक्ष कर्तन
शीर्षक : मत काट रे मानव मुझेमत काट रे तू मानव मुझे ,सच कहे सब दानव तुझे ।अपनी कोई परवाह…
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साहित्य
भावपल्लवन
श्लोक:-जातकर्म नामकरणं निष्क्रमणमथान्नदम्।चूडाकर्म च कर्तव्यमिति धर्मविदो विदुः।।(मनुस्मृति 2.27)अर्थ: धर्मज्ञ पुरुषों ने कहा है कि जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन और चूड़ाकर्म,…
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साहित्य
ये सन्नाटे
ये सन्नाटेजब जुबां साथ नहीं देती है,मन के भाव उमड़ते हैं तब,सन्नाटे बोलते हैं।आंसुओं को पलकें रोक लेती हैं,बंद आंखें…
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साहित्य
समाधि पाद सूत्र– ४०
परमाणुपरममहत्त्वान्तोऽस्य वशीकारः । {उस समय} अस्य= इसका; परमाणुपरम महत्त्वान्तः= परमाणु से लेकर परम महत्व तक; वशीकार:= वशीकार {हो जाता है}…
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साहित्य
आभार—समर्पण
(डॉ. गुंडाल विजय कुमार जी के लिए) आपकी वाणी में करुणा है,आपके कर्म में सेवा है।हर दिल को जो छू…
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साहित्य
तेरी ख़ुशबू नहीं ला पाता हूँ…
अगर तू नहीं मिलेगा, तो ऐसा थोड़े हैं कि मर जाएंगे हम,हाँ, ये सच है… तेरे इश्क़ में उन गलियों…
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साहित्य
भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति का वैश्विक योगदान है या नहीं है ?
भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति का वैश्विक योगदान पूर्ण रूप से देखा जा सकता है। भारत विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता…
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