Vijay Kumar
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साहित्य
साहित्य
जिसे लिखते, जिसे पढ़ते,ज्ञान जिससे अर्जित करते,देश, काल और परिस्थिति काचित्र मन में अंकित करते।। समाज का दर्पण कहलाता,समाज के…
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नवगीत दो पल
पल दो पल बस साथ चलो, दो पल ही सही, मैं खुश हो लूँ। किस्मत ने राह अलग कर दी,…
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समाधि पाद सूत्र– २९
ततः प्रत्येक्चेतनाधिगमोऽप्यन्तराया भावश्च । ततः= उक्त साधन से; अन्तरायाभाव= विघ्नों का अभाव; च= और; प्रत्यक्चेतनाधिगमः= अन्तरात्मा के स्वरूप का ज्ञान;…
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दो राहें
एक राह थी — जिसको मंज़िल नहीं,दूजी राह — जिस पर तू नहीं।मैं वीरान जंगल में खड़ा हूँ,सोचता हूँ अब…
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कुसंग— स्वरचित कविता
(१)धीरे-धीरे मन में घुलता, मुस्कान भरा ज़हर,झूठ लपेटे सत्य को, दिखे बड़ा ही सुन्दर।पहले लगता साथ मधुर, फिर बाँध ले…
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महिमा अगम अपार है छठी मैया
" मैया की महिमा अपार हे छठी माता मैया के घाट पर व्रती बहुत हैं हाथ जोड़ पनियां में खाड़"…
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय और आधुनिक भारत
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी आधुनिक भारत के उन युगनिर्माताओं में से एक हैं, जिन्होंने राजनीति को केवल सत्ता का साधन…
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तुम्हारा न होना
कई दिनों से सूरज तो आता है मेरी देहरी पर प्रभात की उंगली थामें किन्तु मेरी देहरी में धूप ही…
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मन करता है।
लहरों पर घर बनाने का मन करता है,मौजों में डूब जाने का मन करता है।एक अपना भी आशियाना हो तरंगों…
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बरिखा
तू कईसन बाड़ू ए बरिखा ,तोहर अलगे चले चरीखा ।हॅंसुआ लगन खुरपी बियाह ,का तोहर ईहे बाटे तरीका ।।कईसे होई…
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