Vijay Kumar
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साहित्य
कर्म की तलवार
होती कर्म की भी तलवार,जिसकी होती जग में धार।शुभ कर्म जीवन का सार,कर्म ही करते जग में हार।। बन्दे शुद्ध…
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काव्य-कलाम की उड़ान
रामेश्वरम के मस्जिद वाली गली में , चुने पत्थर का घर था प्यारा। सादा जीवन, ऊँचे विचार, यही था उनका…
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साहित्य
अंधेरे और उजाले
अंधेरे और उजाले, उजाले और अंधेरेहर मनुष्य के जीवन में है पसरे।अंधेरों के सन्नाटे से घबराया, छटपटायाइंसान, सुकून का उजाला…
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साहित्य
यह सड़क
जब से होश संभालाहमने महसूस किया,जिंदगी की सड़क परमुसीबतों के ढेरों गड्ढेऔर अंधे मोड़ हैं।छुपी हुई चाहतों का शोर है,समझौतों…
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साहित्य
भारतीय नारी: गौरव -गरिमा और महिमा
“नारी ईश्वर की बनाई अद्भुत शक्ति हैसमाज ,परिवार और देश को एकता के बंधन में बांधे रखती है”नारी को भारतीय…
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साहित्य
भक्त कन्नप्पा का समर्पण
जंगल की छाया में, सरल हृदय का एक था वीर,शस्त्र न था धर्म उसका, बस शिव था उसकी पीर।न वेदों…
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माया
माया की इस नगरी में,सब माया से दूर है,माया तो उसके पास है,जिसके पास “माया” है। इस दुनिया में सबसे…
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साहित्य
पूरे विश्व के संवाद को भाषा देना अनुवाद का मूल ध्येय
– डॉ पूनमचंद टंडन साझा संसार फाऊंडेशन की पहल पर, ‘अन्तर्राष्ट्रीय अनुवाद काव्य-पाठ’ ऑनलाइन आयोजन, डॉ पूनमचंद टंडन, महासचिव, भारतीय…
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साहित्य
कविता — बवाल हो गया
खामोश रहते थे हमेशालोगों की सुन सुनकर,एक बार जो कहने लगे हमतो जैसे बवाल हो गया । सारा जमाना था…
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साहित्य
अंतःप्राज्ञ – स्वरचित कहानी
शहर के शोर और भागदौड़ से दूर, हिमालय की गोद में एक शांत कुटिया थी। कुटिया के चारों ओर ऊँचे…
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