Vijay Kumar
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साहित्य
सांच को आंच नहीं
कहते हैं सांच को आंच नहींपर यह सच्ची भी बात नहीं हमने देखें सच्चें सूली चढ़तेझूठे लोग सदा रहते हैं…
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साहित्य
नारी शिक्षा का महत्त्व
आधुनिक युग में नारी की शिक्षा उतनी ही अपेक्षित है जितनी की पुरुष की शिक्षित नारी ही प्रगति की मंजिल…
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साहित्य
जीवन मूल
प्रेम करो, सब से करो,प्रेम है पूजा, प्रेम है पावन;प्रेम ही मैं, बस प्रेम ही तू,मेरे ही राधा, प्रेम ही…
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साहित्य
मृत्यु की नदी
रचनाकार -हरनारायण कुर्रेशिर्षक मृत्यु की नदीविधा- काव्य,श्रेणी – जीवनमृत्यु की नदी, काली जलधारा,अज्ञात तट की ओर बहती अनवरत।किनारों पर जीवन…
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साहित्य
मातृत्व- लघुकथा
“ये प्रथम पुरस्कार मेने नहीं मेरी मां के मातृत्व ने जीता हैं , आज मेरी मां की ममता जीत गई…
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साहित्य
मेरे एहसास
कैसा कुठाराघात है विश्वास पर ,वज्र प्रहार किया तूने प्यास पर ।विश्वास उठा जहर से भी अब ,कैसे विश्वास करूॅं…
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साहित्य
महाप्राज्ञ- आलेख
महाप्राज्ञ — यह केवल एक शब्द नहीं, यह आत्मा की पुकार है। इसमें वह दिव्य प्रकाश छिपा है जो मनुष्य…
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साहित्य
21वीं सदी की नारी
नारी सीमित नहीं है अब,रसोई की दहलीज़ तक,गूँज रही है आवाज़,हर दिशा, हर महफ़िल तक। वो 21वीं सदी की नारी…
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साहित्य
अपूर्ण सौंदर्य
कोई बग़ीचा बता दो, जहाँ गुलाब में काँटे न हों,चन्दन का वृक्ष जहाँ हो, पर विषधर लिपटे न हों। जिस…
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साहित्य
ऊंची उड़ान
रामेश्वरम के तट से उठी,एक छोटी सी मशाल,अखबारों में रोशनी देखी,बदल दिया हर हाल। वो मिसाइल मैन है,सपनों का रॉकेट,‘अग्नि’,…
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