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अधिकार और कर्तव्य
विधा : आलेखदिनांक : 8 मई , 2026 ईश्वर के द्वारा सृष्ट प्राणियों में मानव को विवेकशील प्राणी बनाया गया…
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मां की ममता
माँ तेरे आँचल में छिप जाऊँ मैं,तेरी ममता की छाँव में मुस्काऊँ मैं। दुनिया की धूप जब मुझको सताती है,तेरी…
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गुरु वंदना,
बं दउं गुरु पद पदुम परागा,सुरुचि सुबास सरस अनुरागा।अमीअ मूरिमय चूरन चारू,समन सकल भव रूज परिवारू। । सुकृति संभुतन विमल…
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यादों का पुराना संदूक
मन का एक कोना खालीआज भी संजोकर रखती हूं।कहीं भर ना जाए वह कोनाआज भी कोशिश करती हूं। यादों का…
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माँ- मेरा पहला संसार है
विधा – कविताशीर्षक- माँ की ममता माँ की ममता की छांव में,जीवन मेरा धन्य हो जाता है lतेरे ही आँचल…
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भाग 2(खड़ावदा की आवाज)
कविताहमारे जनप्रतिनिधियों को कवि गोपाल जाटव विद्रोही का राम रामहमारे घर के सामने है रास्ता आमअक्सर हमारे घर के सामने…
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माँ…
माँ, तू कैसे जान जाती हैमैं क्या कर रही हूँ हर पल,मेरे हर कदम की आहट कोकैसे पहचान लेती है…
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माँ का आँचल : एक संस्मरण
मेरा सैनिक जीवन और मेरी दादी माँ, माँ मैं एक सैनिक हूँ,मैं अब रिटायर्ड हूँ,मेरी माँ की कहानी,मेरी अपनी जुबानी।…
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पक्ष विपक्ष दुश्मन बन बैठे हैं
जल में रहकर मगरमच्छ से बैर,उन शैतानों के भी होते हैं दो पैर,बिना किसी प्रतिबंध वे घूम रहे हैं,छोटी बड़ी…
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कर्म कर, फल की इच्छा न कर
पक्षी तो बिना किसी नक़्शे केअपने गंतव्य तक पहुँच जाते है,पर हम इंसान दिल से दिल तकपहुँचने में प्राय: नाकाम…
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