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  • माँ की महिमा

    प्यारी प्यारी मेरी माँ प्यारी प्यारी मेरी माँ, जोड़े पाई-पाई माँ। दुखः से पर्वत राई माँ, हारी नही लड़ाई माँ।…

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  • अतुकांत कविता

    जब भी किसी से बोलिए शब्दों को पहले तोलिए। तुम जो न सह सको कभी वो बोल क्यों कर बोलिए?…

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  • परीक्षा की घड़ी

    जब आए परीक्षा की घड़ी,मत घबरा, हो जा तू खड़ी।काँपते हाथों को थाम ले,चढ़ जा सपनों की सीढ़ी। कलम को…

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  • मेरा चांद

    ऐसे भी ना इतरा ए चांदतू अपनी खूबसूरती पर,मैंने भी तो छिपा रखा हैएक प्यारा सा चांद इस धरती पर।…

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  • तोर सुरता मां

    तोर सुरता मां, आज होले कोन जाने अब्बड़ जनाइस ,रही रही के मोर आंखी के डबरा ल उछलत ले भराईस।…

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  • तीर्थ — पंचप्रायश्चित का दूसरा आयाम               

    १. प्रस्तावना हमारे वेद, शास्त्र और पुराण बताते हैं कि मानव जीवन केवल कर्म करने तक सीमित नहीं है, बल्कि…

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  • काव्य –आशीषों का उपहार

    खुशियों से महक उठता सारा घर आँगन।बच्चों की हँसी से रोशन हो सारा जीवन।। सपनों की ऊँचाई छूते रहें हरदम,।माता…

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  • समाधि पाद सूत्र– १४

    स तु दीर्घ कालनैरन्तर्यसत्काराऽऽसेवितो दृढ़भूमि: । तु=परंतु; सः= वह {अभ्यास}; दीर्घकालनैरन्तर्यसकारासेवितः= बहुत कल तक निरंतर लगातार और आदर पूर्वक सांगोपांग…

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  • श्राद्ध

    रचनाकार-सुनील कुमार खुराना नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश बिना श्रद्धा के निरर्थक जीवन,श्रद्धा से सब कुछ मिलें श्रीमन।श्रद्धा से मिलती सारी…

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  • ​बैरन बाँसुरी

    ​ओ बाँसुरी! तू क्यों आई,क्यों मेरी सौतन कहलाई?कान्हा के अधरों पर बैठी,हर पल प्रेम की प्यास बुझाई। ​मैं राधा, प्रेम…

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