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समाधि पाद सूत्र– २४
क्लेशकर्मविपाकाशयैरपरामृष्टः पुरुषविशेषः ईश्वर: । क्लेशकर्मविपाकाशयै:= क्लेश, कर्म, विपाक और आशय– इन चारों से; अपरामृष्टः= जो सम्बन्धित नहीं है; {तथा} पुरुषविशेष:=…
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समाधि पाद सूत्र–२३
ईश्वर प्रणिधानाद्वा । वा= इसके सिवा; ईश्वरप्रणिधानात्= ईश्वर प्रणीधन से भी {निर्बीज-समाधि की सिद्धि शीघ्र हो सकती है} । अनुवाद–…
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समाधिपाद सूत्र– 22
मृदुमध्यादिमात्रत्वात्ततोऽपि विशेषः । मृदुमध्याधिमात्रत्वात्= साधन की मात्रा हल्की, मध्य और उच्च होने के कारण; ततः= तीव्र संवेगवालों में; अपि= भी;…
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पल दो पल
पल दो पल ही सही,तुम साथ चलो। पल दो पल ही सही,चुप रहो, ना बोलो। ना तुम कुछ कहो, ना…
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सुई की नोक
सुई की नोक पर लटकी है मेरी रूह,एक झोंका हवा, और बिखर जाएँ आँसुओं के मोती।धागे-से बंधे हैं टूटते सपने,काँपती…
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दिल की राख
शायरीरात ने चाँद को भी छुपा लिया किसी बात पर,हमने भी दिल को सुला लिया हर आघात पर।अब ना तेरा…
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ऋषि की दुनिया
ऋषि की दुनिया है यह ,ऋषि की पावन धरती ।सुख दुःख में एक रहे ,सुखद आनंद है वरती ।।दुनिया है…
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भावपल्लवन
श्लोक“दीपो भासयते लोकं आत्मदीपः स्वयं भव।”-स्कन्द पुराण, दीपमाहात्म्य (अध्याय ३)अर्थात, बाहरी दीप तो संसार को प्रकाशित करता है, परंतु जो…
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मायके के दो पल (मेरा घर)
चल रहे थे अंतर्मन में द्वंद ,कैसे जा पाऊंगी मां बिन मायका बनके नन्द। हर दीवार ,हर कोना पुकारे ,तेरे…
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भाई दूज
मानव मान है मानवता ,मानव मान या न मान ।मानव मन समझ गए तो ,युग करे तेरा यशगान ।।जीवन मूल…
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