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  • भटकन

    प्रथम खण्ड : अधूरे घाव कुछ घाव ऐसे हैंजिन पर समय भी मरहम नहीं रखता।वे रिसते रहते हैं—जैसे इतिहास की…

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  • कुछ और है

    जी हांखलबली मची है दिलोंके भीतर,पर मामला कुछ और है।।साहूकार ही बन बैठा हैआज चोर यहांजरा समझजाओ दुनिया वालोयहां मामला…

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  • बस तू हैं ।

    तुम मेरी ज़िंदगी हो, तुम ही मेरी बंदगी हो,तू है तो ये दिन-रात हैं, नहीं तो ज़िंदगी बेकार। तेरे चेहरे…

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  • हिंदी भाषा दिवस – हिंदी का गौरव और भविष्य

    भारत की विविधता में एकता का प्रतीक बनकर उभरी हमारी हिंदी भाषा आज केवल भारत की ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय…

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  • अस्तित्व की जंग

    अस्तित्व पर जब आंच आए,दूसरे को ना कभी मौका देना।लड़ जाना अधिकार के लिए…बस हौसलों से काम लेना। सवाल भूख…

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  • चलो नेह का दीप जलाऍं

    आओ हम तुम एक हो जाऍं ,अहम रूपी तम को मिटाऍं ।मनु वंशज मनुज हैं हम सब ,चलो नेह का…

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  • ब्रह्मनादचतुष्टयी का ज्योतिषीय संबंध

    ब्रह्मनादचतुष्टयी—अकार, उकार, मकार और ॐकार जो मानव जीवन और सृष्टि के चार मूल आयामों की दिव्य ध्वनियाँ हैं। वेदांत और…

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  • बुलबुला और इंसान

    बुलबुले को देखकर इंसानकरता है गहन चिंतन,” यह कैसा जीवन?पूरा होने से पहले हीटूट जाए सपन? “कितना है नादानये इंसान!!!!बुलबुले…

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  • देता हैं।

    ख़ामोशियों के बीच दिल का दर्द सुनाई देता है,हर तन्हा रात में तेरा चेहरा दिखाई देता है। पंख फैलाकर उड़…

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  • परम आनंद ढूॅंढ

    ढूॅंढ़ ढूॅंढ़ ,क्या ढूॅंढ़ रहा है तू ,ढूॅंढ़ ढूॅंढ़ ,परम आनंद तो ढूॅंढ़ ।बहुत ढूॅंढा़ तू किताबों ,बहुत ढूॅंढा़ तू…

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