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राष्ट्रीय एकता और हिंदी
“राष्ट्रीय एकता को बनाए रखना हैदेश को सजाए रखना है”राष्ट्रीय एकता का सूत्र है हिंदी। भारत देश कई विधाओं का…
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हिन्दी की चटनी।
रचना विधा :- कविता।मौलिक रचनाकार:- संदीप शर्मा सरल। काव्यांश हिंदी को तुम रोज जिमाना, चबा चबा कर खूब बतियाना, बनाकर…
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थोड़ा सा इश्क़ करें क्या?
रूपेश सिंह लॉस्टम थोड़ा सा इश्क़ करें क्या,ये छोटा-सा रिस्क़ लें क्या? दिल में छुपा के रखूंगा,दुनिया वालों से बचा…
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विहान
मैंने देखा एक ख्वाब है—सज्जित नव ज्ञान सेआया नव विहान है।भूल भ्रांति या विचलननाम ना निशान है!मैंने देखा एक ख्वाब…
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संकेत
सूर्योदय संकेत है जागृति का,सूर्यास्त संकेत है विश्राम का, संकेत है हरि नाम का। विस्मृति हुई जो हर प्रहर, स्मृति का…
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सरस छंद पर आधारित पद्य”नफ़रत”
1.नफ़रत की आँधी जब चलती, सबका चैन उड़ाती है,मन को काले रंगों से ये, भीतर तक गहराती है।प्रीति-प्यार की बगिया…
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पतझड़ — तुकबंदी अंताक्षरी
पतझड़* सी ये पतझार जिंदगी मेरीबनके बसंत बहार तुम जो आ जाओ जिंदगी*ये हो जाएगी सतरंगी मेरीबनके इंद्रधनुषी रंग तुम…
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क्या आज हमारे तीज त्यौहार श्रद्धा से ज्यादा खर्चीले व दिखावटी हो गए हैं..?
“देखो आज सब कुछ बदल गया हैप्रमुख त्यौहार अपनी रंगत खोते जा रहा हैत्योहार सिर्फ औपचारिकताएं निभाने के लिए मनाये…
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विडंबना
चर्चा सरेआम हो रही है, भइया कच्चे आम हो रहे हैं,खट्टी-मीठी, तीखी-फीकी बातों से जनता को बहला रहे हैं। लगता…
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तांडव प्रकृति का
अलसाई सी.. है धरा..मुरझाई सी… है हवा..है, करुण वेदन यह,कैसा, धरा पर…है, मातम सा मचा।क्रुध क्यों है, प्रकृति…यह कैसा…. शोर…
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