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  • अद्वैत का आरंभ

    (स्वरचित काव्य) (1)न दिन था कोई, न रात थी, न धरती थी, न गगन,न शब्द कहीं, न रूप था, न…

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  • सावन है मुस्कान धरा का

    दिनांक : 20 जुलाई , 2025दिवा : रविवारसावन है मुस्कान धरा का ,सावन है व्याख्यान धरा का ।सावन धरा पल्लवित…

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  • गुरु, गुरुवर, सदगुरु और ब्रह्मसत्ता

    (स्वरचित काव्य — योगेश गहतोड़ी)(भाग-2)(1)गुरु संदेह मिटाते हैं, चलना हमें सिखाते हैं,गुरुवर मन को शांत करें, शुभ-संकेत जगाते हैं,सदगुरु ज्ञान…

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  • ” नारी तुम नारायणी”

                     “हम”                      जीवन के समरांगण में                            “क्षत्राणी”                          सी सदा सर्वदा,                                “हम”                           अपने महल में                              ” इन्द्राणी “                            सी सदा सर्वदा।                                  …

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  • खिलौनों की तलाश

    खिलौनें खोजते है,वो नन्हे नन्हें हाथ,मासूमियत भरे जज़्बात,जो तोड़ते थे उनको ,इक टकराहट के बाद।। विरह मे सब अब वे…

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  • एक की पहचान

    (स्वरचित काव्य रचना) एक की पहचान न बाहर में,न रूप, न ही व्यवहार में।वो तो रहता सूक्ष्म सुरों में,हर जीवों…

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  • जातकर्म संस्कार

    !! जातकर्मसंस्कार का परिचय एवं महत्त्व !! बालक के जन्म होने से पूर्व तीन संस्कार होते हैं— गर्भाधान, पुन्सवन तथा…

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  • आशीष लेना हो तो उनसे ले लो

    आशीष लेना हो तो उनसे लो ,जो गरीब असहाय निर्बल होते हैं ।उनका आशीष लेना ही क्या ,जो स्वयं सुख…

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  • शिव महिमा एवं स्तुति (दोहे)

    जय औघड़दानी प्रभु, जय महेश त्रिपुरारि।शरण गहे की राखिये, खल कामादि निवारि।। जटा-जुट सिर सोहहीं, अरु शशि, गंग बिशाल।मुण्डमाल तन…

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  • गुरु, गुरुदेव, सदगुरु और परमब्रह्म

    गुरु दीप जलाएं ज्ञान का, अंधियारा सब दूर करें,गुरुदेव प्रेम की गंगा बनकर, मन में उजास भरें।सदगुरु खोलें अंतर्मन को,…

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