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षोडश संस्कारों की आवश्यकता
संस्कार – कार्य के अधिकारी– अधिकार अनुसार कर्म करने की सम्यक फल की प्राप्ति होती है । संस्कार कर्म में…
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स्मृतियों के झरोखों से
स्मृतियों के झरोखों से जो देखीमां मुझे तुम बहुत याद आईमुझे आज भी तुम्हारी याद बहुतसताती हैवह मेरे लिए लजीज…
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लक्ष्य प्राप्ति की राह
आज इंसान लक्ष्य से भटक रहा है,यही भटकाव सबको थका रहा है,इस भटकाव की कथा लिख रहा हूँ,मालिक व श्वान…
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हमारे शब्द और हमारी सोच
हमारे शब्द और हमारी सोच दोनोही अत्यंत संवेदनशील होते हैं,कभी इनसे नज़दीकियाँ बढ़ती हैं,तो कभी हमारी दूरियाँ बढ़ा देते हैं।…
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आषाढ़ का पहला दिनहे !
मेघ क्या तुम फिर सेदूत बन कर जाओगे?वहां जहां हादसा हो गयाबरसाओगे कुछ जल,तुम भी बरसाना कुछअश्रु जल ताकितुम्हारी शीतल…
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षोडश संस्कारों की आवश्यकता
संस्कार का प्रयोजन और उसके भेद— संस्कार सामान्यतः दो प्रकार के होते हैं—एक है दोषापनयन ।दूसरा है गुणाधान ।कुछ विद्वानों…
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साक्षरता का अलख
साक्षरता का अलख जगाकर,शिक्षित सबको करना है।संकल्पों का दीप जला कर,ज्ञान उजाला भरना है। साक्षरता की राह पर चलें, शिक्षा…
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बनवा दो सांसद मुझे (बाल कविता)
पापा मुझे भी बनवा दो सांसदबनवा दो ना बनवा दो नामैं भी जन की सेवा करूंगामैं भी देश की सेवा…
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“तो हम विश्व गुरु कैसे बन पाएँगे” – कवि डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र “आदित्य” की कविता की समीक्षा
डॉ.यल.कोमुरा रेड्डीसमीक्षक, कवि और लेखकवारंगल जिला, तेलंगाना राज्य कवि डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र “आदित्य” की कविता “तो हम विश्व गुरु…
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देवशयनी एकादशी कहा जाता है
एकादशी महत्वपूर्ण तिथि होती है,वर्ष में चौबीस एकादशी होती हैं,अधिकमास या मलमास आता है,तब एकादशी छब्बीस हो जाती हैं। आषाढ़…
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